डॉ. संगीता पांडेय को नई दिल्ली में ‘विद्या वाचस्पति’ (पीएच.डी.) की उपाधि प्रदान
शिवाजी शिंदे
जिला प्रतिनिधि, परभणी
नई दिल्ली :
हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने के लिए कार्यरत पं. दीनदयाल उपाध्याय हिंदी विश्वविद्यालय (मथुरा) द्वारा आयोजित भव्य समारोह में महाराष्ट्र में बिहार की मूल निवासी तथा वर्तमान में पुणे में निवासरत श्रीमती संगीता पांडेय को सम्मानपूर्वक ‘विद्या वाचस्पति’ (पीएच.डी.) की उपाधि प्रदान की गई।
यह राष्ट्रीय हिंदी संगोष्ठी नई दिल्ली स्थित रेडिसन ब्लू होटल में संपन्न हुई, जिसमें देशभर के 60 विद्वानों को सम्मानित किया गया। यह सम्मान समारोह झांसी की रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति पद्मश्री डॉ. अरविंद कुमार, विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. इंदू भूषण मिश्रा, छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रबल प्रताप सिंह जू देव, तथा रेलवे बोर्ड (ZRUCC) के सदस्य डॉ. शिवाजी रामभाऊ शिंदे की प्रमुख उपस्थिति में संपन्न हुआ।
अध्यापन क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए संगीता पांडेय को पदक, प्रशस्ति पत्र एवं शॉल देकर सम्मानित किया गया। उन्हें अध्यापन क्षेत्र में 4 वर्षों का अनुभव है।
डॉ. संगीता पांडेय बिहार के मोतिहारी जिले की निवासी हैं। वे प्रसिद्ध अधिवक्ता एवं उद्योगपति स्व. विजय कुमार मिश्रा की पुत्री हैं। वे अत्यंत प्रतिभाशाली और उच्च शिक्षित हैं। उन्होंने 10वीं कक्षा की परीक्षा में पूरे बिहार राज्य में छठा स्थान प्राप्त किया था। इंटरमीडिएट साइंस में वे स्वर्ण पदक विजेता रहीं और प्राणीशास्त्र (जूलॉजी) विषय में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुईं।
उन्होंने आगे की पढ़ाई मोदी इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर से पूरी की। इसके पश्चात उनके पिता का निधन हो गया, लेकिन उनके सपनों को पूरा करने के लिए उन्होंने हार नहीं मानी और बायोटेक्नोलॉजी में प्रथम श्रेणी से सफलता प्राप्त की। यहीं न रुकते हुए, उन्होंने अत्यंत साहस के साथ एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टिट्यूट, नागपुर से अपना शोध कार्य पूर्ण किया।
महज 37 वर्ष की आयु में उन्होंने कई सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से गरीब और होनहार विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा, आवश्यक शैक्षणिक सामग्री, कपड़े, भोजन एवं रहने की व्यवस्था उपलब्ध कराई। आज भी वे अनेक जरूरतमंद और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान कर रही हैं।








